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डेटिंग के बारे में कुछ बातें ख़ास लड़कों के लिए


क्या आप जानने चाहते है की लड़कियों को कैसे नहीं पटाया जाए? एक्सपर्ट्स से पूछिए: सिंगल लड़कियां, जी हाँ वो लड़कियां जो किसी रिश्ते में नहीं हैं।
कुछ लोगों को लिए डेटिंग बाए हाथ का खेल होता है, पर कुछ लोगों को इसमें थोड़ी मदद की ज़रूरत पड़ती है। वो भी यह जानने के लिए की आखिर हम क्या गलत कर रहे हैं। हमने पांच महिलाओं से पूछा की आखिर लड़कों को लड़कियां पटाने के लिए क्या नहीं करना चाहिए। इस बारे में हमने कुछ टिप्स ली - कुछ ज़रूरी टिप्स।

ज़बरदस्ती पीछे ना पड़ो

रेशमी (बदला हुआ नाम) एक प्रोग्राम संयोजक हैं।

लगातार पीछे पड़े रहो - लड़कों के लिए एक सबसे बड़ा झूठ है जिसे वो सच मानाने की कोशिश करते रहते है। अगर आपके बार-बार पीछा करने के बावजूद भी आपको ये सिग्नल मिल रहा है की लड़की को आप में कोई रुचि नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं की आप और ज्यादा कोशिश करते रहे। इसका मतलब है की अब यह कोशिश आप बंद कर दें। और अगर आपने यह ज़बरदस्ती पीछा करने वाली टिपणी बोलीवुड से सीखी हैं तो प्लीज इसे दिमाग से बिलकुल निकाल दें। यह लड्कोयों को सिर्फ परेशान करने का एक तरीका है, उनका दिल जीतने का नहीं।

ये समझने के लिए की लड़की आपमें रुचि दिखा रही है या नहीं, प्लीज उस लड़की का रेअक्शन (प्रतिक्रिया) को अच्छे से समझने की कोशिश करें।
अमीर और ज्यादा आच होने का झूठा नाटक ना करें।

कमिय (बदला हुआ नाम) एक वेब डेवेलपर हैं।

मैं किसी को इम्प्रेस करने का प्रयास करने के विरोध में बिलकुल नहीं लेकिन मैंने ऐसी मुलाकातें भी देखी हैं जहाँ लड़के इम्प्रैशन के प्रयास में खुद को बेवक़ूफ़ साबित कर बैठते हैं।

अपने आपको उतना ही पेश करें जितने आप हैं। ज़्यादा अमीर, समझदार और अच्छा दिखने के चक्कर में कई बार हम कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिस से ये सब नाटक जैसा लगने लगता है।

कॉमेडियन मत बनिए

आराधना (परिवर्तित नाम) एक एच आर मेनेजर है।

जो लड़के आपको हंसा सकें वो बेशक आकर्षक लगते हैं। लेकिन जब कोई ज़रूरत से ज्यादा हाजिरजवाब बनने की कोशिश करे तो चिढ़ होने लडती है। मज़ाकिया होना अच्छी बात है लेकिन उसकी भी सीमा है। मज़ाक अपनी जगह अच्छी चीज़ है लेकिन पुरुष ऐसा होना चाहिए जिस से गंभीर बात भी की जा सके।

मुझे ऐसी मुलाकात भी याद है जहाँ वो लड़का अपने मजाकों में इतना खो गया की वो भूल गया की मैंने काफी देर तक एक शब्द भी नहीं बोल। वो इसलिए क्यूंकि उसे मेरे शब्दों से ज्यादा हाजिरजवाबी की फिक्र थी। तो यदि किसी लड़की को इम्प्रेस करना है तो अपने मजाकों पर लगाम कसना भी ज़रूरी है।

शारीरिक सम्बन्ध बनाने की जल्दबाजी करना सही नहीं।

अर्पिता(परिवर्तित नाम) एक लॉ स्टूडेंट हैं।

यदि किसी लड़के को देख कर मनन में घंटी न बजे तो मैं उसके बारे में बिलकुल विचार करना पसंद नअहिं करुँगी। चाहे वो हर मायने में सम्पूर्ण हो, लेकिन उसे देख कर मन में हलचल न हो तो उसकी सम्पूर्णता के कोई मायने नहीं हैं।
और क्यूंकि मुझे मालूम है की दो लोगों के बीच का ये आकर्षण कोई आम बात नहीं है तो मेरी सलाह उस लड़के को यही होगी की वो जल्दबाजी न केर और रिश्ते को पकने का समय दे। शारीरिक आकर्षण बढ़ने दे। ये आकर्षण बहुत ज़रूरी है। चीज़ें अपनी गति से हों तो बेहतर है और शारीरक संबंधों के लिए जल्दबाजी करना बिलकुल अनाकर्षक है।

भावनात्मक दूरी

सुनैना(परिवर्तित नाम) एक फ़ूड ब्लॉगर हैं।

यदि कसीस लड़के को मुझमे दिलचस्पी होगी तो वो ज़रूर मुझे समझा पायेगा की वो मेरे बारे में, अपनी ज़िन्दगी के बारे में, परिवार के बारे में क्या सोचता है। लेकिन अधिकांश लड़के इस बारे में बात करना ही नहीं चाहते।

उन्हे सब्र की ज़रूरत है- सिर्फ इसलिए की मैं तुमसे तुम्हारी रूचि जानना चाहती हूँ, इसका अर्थ ये नहीं की मैं तुम्हारे मामलो में दखल करने वाली गर्लफ्रेंड बनना चाहती हूँ। आखिरकार ये सिर्फ बातचीत ही तो है और साफ़ बातचीत आगे की रह को बेशक आसान बना देती है।

लड़कों के लिए सेक्स शिक्षा


भारतीय समाज में लोग सेक्स की बातें करने से शरमाते हैं। 21वीं सदी के बाद भी सेक्स शिक्षा भारत में शुरू नहीं हो पायी है। सेक्स‍ शिक्षा पर टीवी और अन्य स्रोतों से होने वाले प्रसारण को लोग अश्लील कहते हैं। भारत में सेक्स शिक्षा पर बच्चे और माता-पिता खुलकर बातें नहीं कर पाते हैं। सेक्स की अधूरी जानकारी मिलने पर लडके अपने दोस्तों के साथ उसका एक्सपेरिमेंट करते हैं जो कि नुकसानदायक हो सकता है। सेक्स शिक्षा के अभाव में लडकों को कई घातक बीमारियां होती हैं। सेक्स में गलती की वजह से एचआईवी/एड्स होने की संभावना होती है जो कि जानलेवा बीमारी है। इसलिए लडकों को सेक्स  की शिक्षा देनी चाहिए जिससे कि वे गलत रास्ते पर न चलें।


लडकों के लिए सेक्स शिक्षा -
  • लडके सेक्स की शिक्षा पर माता-पिता से बात नहीं कर पाते हैं। लडके सेक्स से संबंधित जानकारी हमेशा अपने दोस्तों, टीवी, फिल्में तथा पत्रिकाओं से जुटाते हैं। जो कि अधूरी होती है और जिसकी वजह से भविष्य‍ में कई मुश्किलों का सामना करना होता है।
  • जब बच्चा 12 वर्ष की उम्र पार कर जाए तब माता-पिता को सेक्स शिक्षा देना शुरू कर देना चाहिए। लडकों को सेक्स के बारे में बताने की जिम्मेदारी पिता की होती है। इसलिए हर पिता को अपने बच्चे को सेक्स की शिक्षा देनी चाहिए।
  • लड़के से सेक्स के बारे में बातें करते वक्त जल्दी में न रहें। एक ही बार में सेक्स की पूरी जानकारी बच्चे को न दीजिए। सेक्स से संबंधित मुद्दे पर बात करते हुए धीरे-धीरे आगे बढें।
  • सेक्स के बारे में एक बार में बताने पर लड़का कुछ भी समझ नहीं पाएगा। इसलिए यौन से जुडी बातों को अपने लड़के को आराम से समझाएं। कोशिश यह कीजिए कि एक बार में एक ही विषय पर बताएं।
  • सबसे पहले लडके को यह बताएं की सेक्स क्या है। सेक्स की जरूरत क्यों पडती है और हमारे शरीर के गुप्त अंग किस-किस काम के लिए हैं। इनके उपयोग करने का समय कब आता है इसके अलावा लडके को यह भी बताएं कि समय से पूर्व और असुरक्षित सेक्स से क्या नुकसान होते हैं।
  • लडके को सेक्स शिक्षा देते समय ज्यादा लंबा भाषण मत दीजिए। माता-पिता को सेक्स के बारे में लडके से इस तरह बताना चाहिए कि उसे सुनते हुए उत्तेजना महसूस न हो। माता पिता भी संयमित रहें।
  • लडके को गुप्त अंगों की सटीक और सही जानकारी दीजिए। इसके लिए अगर आपको पूरी जानकारी न हो तो पहले कोई अच्छी किताब पढ लीजिए जिससे कि आप उसे गलत जानकारी न दें।
  • अगर आपके घर में कई लडके हैं तो सभी को अलग-अलग सेक्स शिक्षा दीजिए और कोशिश यह कीजिए कि सभी में गोपनीयता हो। भाई-बहनों को कभी भी एक साथ सेक्स शिक्षा न दीजिए।
  • यदि आपके लडके की सेक्स की शिक्षा के प्रति कोई जिज्ञासा न हो तो उसे जबरदस्ती बताने का प्रयास न करें। क्योंकि जबरदस्ती लडका अच्छे से समझ नहीं पाएगा। रोजाना यह विषय लेकर लडके को समझाने न बैठें। किसी मौके, समय व अवसर पर ही समझाएं।
  • आप अपने लडके को जितने विस्तार से सेक्स शिक्षा देंगे उतना ही अनचाहे गर्भ, यौन रोग, एचआईवी/एड्स के खतरों से आपका लडका दूर रहेगा।
लडके को सेक्स शिक्षा देते समय कोशिश यह होनी चाहिए कि मां भी साथ हो क्योंकि मासिक धर्म के बारे में लडके को मां बेहतर जानकारी दे पाएगी।

अब Facebook फ्रेंड्स से करें Sex


फेसबुक पर आप आमतौर पर लोग दोस्त बनाते हैं, पर बात अब इससे आगे बढ़ रही है। एक नया विवादित सेक्स एप इन दिनों खूब चर्चा में है। एप का नाम है 'बैंग विद फ्रेंड्स'। दावा किया जा रहा है कि यह एप फेसबुक यूजर्स को अपने फ्रेंड्स से सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाने में सहूलियत देता है।


एप की खूबी

एप के जरिए अगर आपने किसी को फिजिकल रिलेशनशिप बनाने के लिए प्रपोज किया और यह प्रपोजल खारिज हो गया तो आपको किसी तरह की शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़ेगी। जबकि आमने-सामने होने पर इन हालात में शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, इस एप से आप फेसबुक पर गुमनाम तौर पर ऐसे फ्रेंड्स की तलाश कर सकते हैं जो रात में आपका साथ देने को तैयार हों। अमूमन ऐसा होता है कि आपके दोस्त आपकी दिलचस्पी के बारे में तब तक नहीं जानते, जब तक कि वे भी आप में उतना ही इंटरेस्ट ना लेते हों।

कैसे करेगा काम

यह एप यूजर्स को तभी अलर्ट करेगा जब दोनों तरफ से 'डाउन टु बैंग' बटन सेलेक्ट करके अपना-अपना इंटरेस्ट जाहिर किया गया हो।

किसने बनाया ये एप

ट्वेंटी- समथिंग्स एज ग्रुप को ध्यान में रखते हुए लाया गया यह एप कैलिफोर्निया के दो कॉलेज गोइंग लड़कों ने तैयार किया है। यूएस मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने अपनी पहचान का खुलासा नहीं किया है।

30 हजार यूजर्स

इस एप क्रिएटर्स के मुताबिक, इसके यूजर्स की तादाद 30 हजार तक पहुंच चुकी है। एक ऑनलाइन टेकसाइट के मुताबिक, एस एप से हर मिनट पांच नए यूजर्स जुड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, यह आइडिया उन्होंने ऑनलाइन डेटिंग साइट मैचडॉटकॉम से लिया है। यानी एक ऐसा आइडिया जिसमें डेटिंग छोड़कर आप सीधे सेक्सुअल रिलेशनशिप तक पहुंच सकते हैं। 

सेक्स में न करें ये 5 गलतियां !


सेक्स के मामले में अक्सर लोग गलतियां कर जाते हैं और ये गलतियां आपको कभी भी किसी भी मुश्किल में डाल सकती हैं। इन्हीं कारणों से सेक्शुअली ट्रांमिटेड डिज़ीज, अनचाही प्रेग्नेंसी और कई तरह के अलग-अलग मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। इससे बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।


 
मल्टिपल पार्टनर: भले ही आप सेफ सेक्स करते हों, लेकिन हमेशा याद रखें कि मल्टिपल सेक्स पार्टनर ही सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिज़ीज की सबसे बड़ी वजह है। अनसेफ सेक्स से पूरी तरह प्रोटेक्शन जैसी कोई व्यवस्था होती ही नहीं है। अपने लिए हमेशा सिर्फ एक भरोसेमंद पार्टनर का साथ रखे।

 
वेश्याओं के साथ संबंध: आंकड़े और शोध बताते हैं कि ज्यादातर वेश्याएं मल्टिपल सेक्शुअल डिज़ीज से ग्रसित होती हैं। इनमें काफी ज्यादा वेशाएं इन्फेक्शन का शिकार हो जाती है। बेहतर होगा कि ऐसे मौके पर आप सड़क पर इधर-उधर किसी को ढूंढने की बजाए एक अच्छा सा कोल्ड शावर लें।

 
नशे में रहकर सेक्स: जब आप अल्कोहल या ड्रग के नशे में हों, तब आपका दिमाग आपके लिए सही फैसले लेने में सक्षम नहीं होता और खासकर यदि आप इमोशनल पर्सन हैं तो तब बिल्कुल भी नहीं। जब आपको पता हो कि आपका यह डिसीजऩ सही नहीं तो ऐसे मौकों पर साफ-साफ ‘न’ कहना सीख लें।

 
एनल सेक्स: एनल सेक्स काफी ज्यादा रिस्की है। खासकर तब तो सबसे खतरनाक, जब असुरक्षित सेक्स हो। इससे एनल कैंसर का भी खतरा हो सकता है। ऐसे सेक्स का फायदा सिर्फ इतना ही है कि इससे प्रेग्नेंसी का खतरा नहीं हो सकता है।

 
असुरक्षित सेक्स: किसी भी सेक्शुअली ऐक्टिव व्यक्ति को कॉन्डम का इस्तेमाल करना ही चाहिए। सेफ्टी के मामले में कॉन्डम अपना 99% काम करता है। यह प्रेग्नेंसी दोनों से सुरक्षा करता है।

आज रात मैं तुम्हारी हूँ

मेरा नाम मोहित है और एल.एल.बी फ़ाइनल में पढ़ता हूँ। बात कुछ समय पहले की है जब मेरे पड़ोसी, जिन्हें मैं चाचा चाची कहता था, की लड़की रूचि ने मेरे ही कॉलेज में इ.सी.इ के पहले साल में प्रवेश लिया। वो बहुत ही सेक्सी है, कद 5'3" फिगर 30-28-32 होगा। हम कॉलेज में कभी कभी मिलते और कोई ख़ास बात न होती। मेरे मन मे कोई गलत ख्याल नहीं था।

एक दिन चाचा-चाची को कुछ दिनों के लिए भर जाना था तो वो रूचि को हमारे यहाँ छोड़ गए ताकि उसकी पढ़ाई खराब न हो। जब वो हमारे घर आई तो बहुत ही कयामत लग रही थी, उसने काले रंग की कसी लैगिंग और कुरता पहन रखा था। मैं तो उसे देखता ही रह गया।

वो एकदम बोली- क्या पहले कभी मुझे नहीं देखा? फिर मैं शरमाकर अपने कमरे में चला गया कुछ देर बाद उसकी मम्मी उसे छोड़ कर चली गई।

हमारे बीच पहले दिन तो कुछ ख़ास बातें नहीं हुई, दूसरे दिन हम इकट्ठे कॉलेज गए और लंच भी साथ में किया और शाम को इकट्ठे घर आ गए।

उस दिन शाम को हम इधर उधर की बातें कर रहे थे कि रूचि अचानक बोल पड़ी- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या? मैंने ना में सर हिला दिया तो बोली- एल.एल.बी में 3 साल हो गए और अभी तक कोई गर्लफ्रेंड नहीं है? मेरे मुँह से पता नहीं कैसे निकल गया- तुम्हारे जैसी कोई मिली नहीं ! तो वो बोली- तो यह बात है बच्चू ! तभी मम्मी ने मुझे बुला लिया और मैं बाज़ार चला गया।

रात को सब बैठकर मूवी देख रहे थे, सर्दी होने के कारण सब रजाई में थे, मैं और रूचि एक ही रजाई में थे, उसने केप्री पहन रखी थी, मेरा पैर उसकी टांगों से छू गया, फिर मैं जानबूझकर पैरो से रूचि की टांगें सहलाने लगा, उसकी तरफ देखा तो वो आराम से टी.वी देख रही थी।

फिर मैंने अपना हाथ उसकी जांघों पर रख दिया और सहलाने लगा। उसकी तरफ देखा तो वो लगातार मुस्कराते हुए टी.वी देख रही थी। इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैं अपना हाथ ऊपर ले गया, उसकी चूत के आसपास दबाने और सहलाने लगा। फिर जब मैं उसकी केप्री के अन्दर हाथ डालने लगा तो वो धीरे से बोली- यह नो एंट्री है ! मैंने उससे कहा- नो एंट्री है तो जुरमाना ले लो। वो बोली- कहाँ है जुरमाना?

मैंने अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिया। पहले तो उसने एकदम छोड़ दिया फिर पकड़ कर बोली- जुरमाना तो काफी बड़ा है।

तो मैंने कहा- अब नो एंट्री में जाने दो।

मैं फिर मैं हाथ अंदर डालने लगा तो हाथ अंदर नहीं जा रहा था। उसने मेरा हाथ अंदर डालने में आगे पीछे होकर मदद की और मैं उसे सहलाने लगा जिससे उसकी सांसें तेज हो गई और चूत गीली।

फिर मैंने अपना लंड अपने कपड़ों के अंदर किया और उठ कर बोला- मैंने यह मूवी देखी हुई है, मैं सोने जा रहा हूँ और उसे कहा- रूचि की बच्ची, मेरी रजाई दे। उसने दो मिनट लगा दिए रजाई देने में ! मुझे पता था वो अपने कपड़े सही कर रही थी। जाते हुए उसे मैं कह गया- रात को कमरे में आ जाना अगर जुरमाना चाहिए तो ! उसने मना कर दिया और मैं कमरे में आ गया।

फिर मैं उसकी प्रतीक्षा करने लगा और पता नहीं कब मुझे नींद आ गई। फिर आधी रात के बाद मेरे कमरे का दरवाजा खुला और बंद होने की आवाज से मेरी नींद खुल गई।

मैंने देखा तो रूचि खड़ी थी और मुस्कुरा रही थी। मैं भी उसे देख कर मुस्कुराने लगा। वो मेरे पास आकर बैठ गई तो मैं बोला- तुमने तो मना किया था?

रूचि- मना तो किया था पर सोचा जब इतना बड़ा जुरमाना दे रहे हो तो तुम्हें नो एंट्री में जाने देना चाहिए। मैंने उसे लेटाया और उसके होंठ चूसने लगा। क्या रसीले होंठ थे उसके ! वो गर्म होने लगी थी।

मैंने अपना हाथ उसके टॉप में डाला, वाह ! क्या मस्त चूचियाँ थी उसकी !मैं उन्हें दबाने लगा तो उसने कहा- धीरे, आराम से ! आज रात मैं तुम्हारी हूँ।

मैं उसके होंठ चूसने लगा और अपनी जीभ उसके मुख में डल दी। फिर मैंने उसका टॉप भी उतार दिया, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, मैं उसके मम्मे चूसने लगा, एक हाथ से दबाने लगा तो दूसरा चूसने लगा। रूचि सिसकारियाँ ले रही थी और बोल रही थी- जोर से ! जोर से मेरे राजा !

मैं बीच बीच में उसकी चूचियाँ काट भी लेता था। फिर मैंने उसकी केप्री भी उतार दी। उसने काले रंग की पेंटी पहन रखी थी, वो और भी सुन्दर लग रही थी।

फिर मैंने उसकी चूत को ऊपर से दबाना शुरू कर दिया, वो सिसकारियाँ लेने लगी। फिर मैंने उसकी पेंटी भी उतार दी और उसकी चूत पर जैसे ही जीभ लगाई, वो उछल पड़ी। फिर मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया। अपनी पैंट और अण्डरवीयर निकाल कर उससे लंड चूसने के लिए कहा। वो भूखी शेरनी की तरह मेरा लण्ड चूसने लगी।

हम 69 की अवस्था में आ गए, मैं उसकी चूत चूस रहा था, वो मेरा लंड ! कुछ देर बाद वो झर गई, मैं उसका सारा पानी चाट गया। फिर वो बोली- और मत तड़पाओ, अब चोद दो मुझे !

मैंने भी सही मौका देखते हुए उसकी टांगें चौड़ी की, उसकी चूत पर लंड रख कर दबाव बनाया तो वो बोली- दर्द हो रहा है।मैंने देखा कि वो अभी तक कुंवारी थी।

मैंने धीरे धीरे जोर बढ़ाया, उसके मुँह पर अपना मुँह रख दिया और एक जोर का धक्का मार दिया जिससे उसकी चीख निकल गई पर मुँह में दबी रह गई।

मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चुका था, रूचि मुझसे कहने लगी- बाहर निकालो ! दर्द हो रहा है। मैंने कहा- पहली बार होता है, मैं अपनी प्यारी रूचि को प्यार से चोदूँगा, अभी दर्द है, फिर कुछ देर बाद मज़ा ही मज़ा !रूचि मना करने लगी पर मैंने मुँह पर मुँह रख एक और शॉट मार दिया जिससे उसकी आँखों में आंसू आ गए, वो रोने लगी।

मेरा लंड तब तक पूरा अन्दर तक जा चुका था और रूचि की चूत से खून निकल रहा था। कुछ देर फिर मैं उसे चूमता रहा और उसके मम्मे चूसत रहा। कुछ देर बाद उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी।

मैंने भी उसे चोदना शुरू कर दिया वो सिसकारियाँ ले रही थी और मुझे बोल रही थी- बेनचोद ने आज फाड़ ही दी मेरी चूत ! ये भी तो साली कब से चुदने तो मचल रही थी ! बुझा दे मेरे राजा आज इसकी प्यास ! बहुत तंग किया है साली ने।

मैं भी बोल रहा था- साली रांड ! आज तेरी माँ चोद दूँगा, बार बार चुदने मेरे पास आयेगी कुतिया !

कुछ देर बाद वो बोली- मैं तो गई रे !

मैंने भी तेज तेज शोट लगाने शुरू कर दिए, मैं भी झरने वाला था, मैंने पूछा- कहा डालूँ?

वो बोली- चूत में मत डालना, मुँह में डालो।

मैंने लंड चूत से निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया और झटके लगाने लगा और उसके मुँह में झर गया।

कुछ देर फिर हम पड़े रहे फिर उसने अपने कपड़े पहने, वो जाने लगी तो उससे चला भी नहीं जा रहा था।

फिर मैंने उससे दर्द की गोली दी और उसे उसके बिस्तर पर लिटा आया।

फिर तो जब भी हमें मौका मिलता है, हम चुदाई कर लेते हैं।

कई मर्दों के साथ सुहागरात

धौलपुर का सराय छोला एक ऐसा गाँव है जहाँ एक परिवार के सभी भाई एक ही दुल्हन से ब्याह रचाते हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा से लगे मुरैना से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बसे इस गाँव में एक जाति एवं समूह विशेष के लोगों में बहुपति प्रथा सालों से चली आ रही है। शादी के बाद दुल्हन को बारी-बारी से सभी भाइयों के साथ रखा जाता है।
जिस तरह महाभारत के पांच पांडवों ने द्रोपदी से शादी की थी, उसी तरह इस गांव के पांच भाई मिलकर एक लड़की से शादी कर रहे हैं। ऐसा किसी रस्म या खुशी से नहीं बल्कि मजबूरी में किया जा रहा है। यहां बसे एक जाति एवं धर्म विशेष के लोगों में लड़कियों की कमी के चलते इस गांव के लोगों ने यह नियम बनाया है। इसके तहत गांव के जिस भी घर में लड़कों की संख्या एक से ज्यादा है वे सभी मिलकर सिर्फ एक ही लड़की से शादी करेंगे। इसके चलते गांव के लगभग सभी घरों में एक ही बहू है जबकि उसके पतियों की संख्या एक से ज्यादा है।
यदि परिवार का कोई भाई अकेले शादी कर दुल्हन लाता है तो उस पर उसके भाइयों का भी बराबर का हक होगा। सराय छोला में रहने वाले व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर बताया है कि उनके समाज में लड़कियों की कमी है जिसकी वजह से ऐसा हो रहा है। उनके अनुसार पूरे गांव में गिने चुने परिवार ही ऐसे हैं जिनमें किसी लड़की का एक ही पति है। वरना पिछले कुछ सालों में जिनती भी शादियाँ हुई हैं उनमें हर लड़की के एक से ज्यादा पति हैं। कई लड़कियाँ तो ऐसी हैं जिनके आठ पति हैं।
सराय छोला के आस-पास करीब 12 ऐसे गांव है जहाँ यह प्रथा सालों से जारी है जिसे गांव के लोग एक नियम की तरह मानते हैं। लेकिन आगे चलकर इसका अंजाम क्या होगा यह किसी ने नहीं सोचा है। प्रकृति के नियमों के खिलाफ इस प्रथा को अभी तक किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की है। इस इलाके में एक ही परिवार में अगर एक से ज्यादा भाई अविवाहित हैं तो वे सभी मिलकर एक लड़की से शादी कर सकते हैं।
गांव के आस-पास के लोग भी इस प्रथा को धीरे-धीरे अपना रहे हैं। लगातार लड़कियों की हो रही हत्या से बदले लिंगानुपात से इस प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है। यहाँ लड़कियों के पैदा होने को अपशगुन मानकर उसकी हत्या कर दी जाती थी। इस कुप्रथा के चलते समाज में लिंगानुपात बहुत बदल गया है।
यहां के लोग अपने पूर्वजों की गलतियों को समझ चुके हैं इसलिए कन्याओं की हत्या में काफी कमी आई है। लेकिन अब भी दूसरे समाज की लड़कियों से विवाह करने को समाज की मान्यता नहीं है जिसकी वजह से इस नई प्रथा का जन्म हुआ है।
दो राज्यों की सीमा पर बसे इन गांवों में शिक्षा की कमी इनके सामाजिक पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण है। सुविधाओं के नाम पर गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है। आगे की पढ़ाई के लिए युवक-युवतियों को कम से कम 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। लिंगानुपात और महिला अधिकार जैसे शब्द ग्रामीणों के लिए अबूझ पहेली की तरह हैं।

सुहागरात के टिप्स

दुल्हा और दुल्हन दोनों की लाईफ का एक यादगार लम्हा होता है सुहागरात। इसलिए इस मौके को ऐसे सेलिब्रेट करें जिससे दोनों एक दूसरे का भरोसा हासिल कर सकें और तमाम उम्र इस रात की मीठी एहसास के साथ एक दूसरे का साथ निभा सकें। याद रखिए सुहागरात में कोई ऐसी नादानी न करें जिसकी टीस जीवनभर आपके दांपत्य जीवन में बनी रहे। इसके लिए इन टिप्स के साथ सुहागरात मनाएं।

लड़के के लिए 5 टिप्स

शादी के बाद पूर्वजों का आशीष लें
शादी के बाद सबसे पहले अपने पूर्वजों का अशीर्वाद लें। शादी में मिले वस्त्रों में से कुछ वस्त्र पूर्वजों के निमित्त ब्रह्मणों को दान दें। शास्त्रों के अनुसार संतान का सुख पूर्वजों के आशीष से ही प्राप्त होता है। दांपत्य जीवन की खुशहाली और वंश परम्परा को आगे ले जाने के लिए संतान प्राप्त करना आवश्यक है। पूर्वजों के आशीर्वाद से गृहस्थी सुखमय रहेगी और संतान सुख भी प्राप्त होगा।

शराब का सेवन भूलवश भी न करें
सुहागरात से पहले शराब का सेवन करने से जीवनसाथी की नज़र में छवि खराब होगी और अपने जीवनसाथी का विश्वास भी आप प्राप्त नहीं कर पाएंगे। इससे सुहागरात के हसीन लम्हों को गंवा सकते हैं जिसकी कसक जीवन भर आपके दिल में रह जाएगी।

दोस्तों के कहने पर कोई ग़लत या अनैतिक व्यवहार न करें
सुहागरात नये रिश्तों की शुरूआत की रात होती है इस मौके पर अपने जीवनसाथी के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करें। दोस्तों एवं रिश्तेदारों की अनैतिक एवं उकसाने वाले बातों पर ध्यान न दें। याद रखें अपनी मर्दानगी दिखाने की कोशिश में कोई भी ग़लत व्यवहार आपके रिश्तों में करवाहट ला सकता है।

चाईल्ड प्लानिंग पर खुलकर चर्चा करें
इस मौके पर हल्के-फुल्के अंदाज में जीवनसाथी के साथ चाईल्ड प्लानिंग के बारे में भी खुलकर बात करें। इससे आपको जीवनसाथी के विचारों को जानने का मौका मिलेगा और साथ ही झिझक भी दूर हो जाएगी। इससे दोनों के बीच नजदीकियां बनाना आसान होगा।

छोटा सा सही उपहार जरूर दें
इस मौके को यादगार बनाने का तरीका यह भी है कि अपने जीवनसाथी को कोई उपहार दें। जरूरी नहीं कि उपहार मंहगा हो आप छोटा सा मगर भावनात्मक रिश्ते जोड़ने वाला कोई भी उपहार इस मौके पर दे।

दुल्हन के लिए 5 टिप्स

श्रृंगार आकर्षक हो और उदास न दिखें
इस मौके पर दुल्हन को खुश दिखना चाहिए एवं उनका श्रृंगार ऐसा होना चाहिए कि दुल्हे मियां देखें तो बस देखते रह जाएं। ऐसा माना जाता है कि जो दुल्हन सुहागरात में पिया का दिल जीत लेती है। जीवनभर पिया उसके दीवाने बने रहते हैं इसलिए इस मौके को गंवाये नहीं।

अपना पूरा भरोसा समर्पण के साथ जताएं
अपने दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने के लिए इस मौके पर दुल्हे के प्रति अपना भरोसा दिखाएं। समर्पण पूर्ण प्रेम के साथ उन्हें यह जताएं कि वह जैसे भी हैं उन्हें वह मन से स्वीकार करती हैं और सदा उनके प्रति विश्वसनीय बनी रहेगी।

अफेयर की बातों को छुपाएं
अगर शादी से पहले किसी से प्रेम संबंध रहा हो तो इस बात का जिक्र सुहागरात के मौके पर न करें। इसे अपने मन में ही रखें और अफेयर को भूल जाएं क्योंकि कितना भी खुले विचारों वाला पति क्यों न हो इस बात को स्वीकार करना उसके लिए सहज नहीं होता है।

अपनी शर्तें लादने की कोशिश न करें
प्यार शर्तों पर नहीं होना चाहिए इससे प्यार की उम्र कम हो जाती है इसलिए सुहागरात के मौके पर अपने दुल्हे मियां के सामने कोई भी शर्त नहीं रखें। उनके प्यार को अपने प्यार से समेट लें।

मर्यादा में रहें और मायके का गुणगान न करें
इस मौके पर मर्यादा का पालन करें। पति से उनके अफेयर के बारे में बात न करें। यह भी ध्यान रखें कि उनके समाने अपने मायके का गुणगान न करें।

औरतों को अब ‘योनि’ चाहिए डिजाइनर

एक अध्ययन में पता चला है कि महिलाओं में अपने 'प्राइवेट पार्ट' को लेकर सजगता बढी है. अब महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट भी डिजाइनर चाहती हैं. ब्रिटेन की एक शोध संस्था ने एक एनीमेटेड फिल्म बनाई है और उसे उम्मीद है कि ये फिल्म महिलाओं में ‘डिजाइनर योनि’ की इच्छा के बारे में बहस को प्रोत्साहित करेगी.

सेंटरफोल्ड नामक इस फिल्म में वेलकम दिखाया गया है कि तीन महिलाएं लेबियाप्लास्टी के बारे में चर्चा कर रही हैं कि इसने उन्हें किस तरह से प्रभावित किया है. 
लेबियाप्लास्टी वह विधि है जिसमें ऑपरेशन के जरिए स्त्री जननांग यानि कि लेबिया के आंतरिक भाग को कम कर दिया जाता है.

कुछ महीने पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा यानी एनएचएस की ओर से दो हजार से भी ज्यादा लेबियाप्लास्टी के ऑपरेशन किए गए।
वहीं जानकारों का कहना है कि यदि अनियंत्रित निजी क्षेत्र में होने वाले ऑपरेशन को भी शामिल कर लिया जाए तो ये संख्या कहीं ज्यादा होगी। इस विधि में लागत तीन हजार पौंड से अधिक की आती है. लेबियाप्लेस्टी मामलों में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी के बावजूद एनएचएस की ओर लेबिया के आकार-प्रकार के बारे में किसी तरह के सामान्य दिशा-निर्देश नहीं तय किए गए हैं.

कुछ महिलाएं योनि के आकार-प्रकार के बारे में अजीबोगरीब सपने देखती हैं . ब्रिटेन के प्लास्टिक सर्जनों का एक संगठन इस सर्जरी से पहले मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग की मांग कर रहा है. इस संगठन का कहना है कि इस सर्जरी से पहले महज 35 प्रतिशत अस्पतालों में ही मनोवैज्ञानिक सलाह की सुविधा है.

गीता भाभी की चुदाई


मैं मुंबई के एक उपनगर डोम्बीवली का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र २३ साल है। मेरा कद 5’6″, रंग सांवला और बदन कसरत की वजह से अच्छा कसा हुआ है, मेरा लण्ड 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।
यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है।
जब मैं बीस साल का था और बी कॉम के आखिरी साल की पढ़ाई कर रहा था।
यह कहानी एक गुजराती भाभी की है जो मेरी ही बिल्डिंग में हमारे नीचे वाली मंजिल पर रहती थी। उसका नाम लीना है वो अपने परिवार के साथ दो साल पहले ही आई थी। उसके परिवार में वो, उसके पति और दो साल का बेटा थे। उसके पति कपड़े के व्यापारी थे। भाभी दिखने में एकदम क़यामत थी उनकी उम्र तब 27 -28 साल की होगी। वो बदनसे एकदम भरी हुई थी, उनकी फीगर 38-28-38 की होगी और जब वो चलती थी तब उनके दोनों कूल्हे ऐसे हिलते थे कि देखकर तो कोई भी अपने होश खो बैठे।
उनके परिवार और मेरे परिवार में अच्छा मेलजोल था और हमारे परिवार एक साथ कई बार खाना खाने और पिकनिक पर जा चुके थे।
मैं तो मन ही मन उन्हें चोदने के सपने देखता रहता था पर मुझे कोई मौका नहीं मिल पा रहा था। पर एक दिन भगवान ने मेरी सुन ली और भाभी के पति को बिज़नस के सिलसिले में आठ दिन के लिए गुजरात जाना पड़ा।
जाने से पहले दिन भाभी के पति ने मेरे पिताजी को पूछा- अगर आपको कोई दिक्कत न हो तो वैभव को मेरे घर सोने के लिए भेज दें !
अच्छे सम्बन्ध होने के कारण पिताजी ने भी हाँ कर दी। जब मुझे यह बात पता चली तो मैं मन ही मन भाभी को चोदने के सपने देखने लगा।
पहले दिन जब मैं भाभी के घर सोने गया तब भाभी खाना खा रही थी और उनका बेटा सो चुका था। भाभी ने गुलाबी रंग का नाइट गाऊन पहन रखा था, क्या मस्त दिख रही थी वो ! गाऊन में उनके चूतड़ और चूचे इतने अच्छे दिख रहे थे कि देखते ही मेरे लौड़े ने सलामी दे दी।
पर मैं चुपचाप जाकर भाभी के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया।
भाभी ने पूछा- क्यों वैभव? खाना खा लिया?
तो मैंने कहा- जी खा लिया !
फ़िर इधर उधर की बातें करके हम सो गए। भाभी अपने बेडरूम में और मैं हाल में सो गया। उस रात मैंने भाभी को सोचकर मुठ मार ली और कुछ नहीं कर सका।
दूसरी रात भी कुछ नहीं हुआ पर मैंने तो मन में ठान ली थी कि मैं भाभी को चोद कर रहूँगा।
जब तीसरे दिन मैं भाभी के घर सोने गया तब मैंने पहले से ही एक ब्लू फिल्म की डीवीडी अपने एक दोस्त से ले ली थी। जब मैं उनके घर गया तब भाभी खाना खा चुकी थी और अपने बालों में नारीयल का तेल लगा रही थी।
मुझे देखा तो बोली- आओ वैभव, खाना हो गया?
तो मैंने कहा- जी भाभी !
फ़िर भाभी ने कहा- आओ मैं तुम्हारे बालों में भी थोड़ा तेल लगाकर मसाज़ कर देती हूँ।
तो मैंने भी हाँ कर दी, इसी बहाने से भाभी को छूने का मौका मिल गया।
भाभी मेरे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी उन्हें तीन चार बार छू लिया। इस वजह से मेरे छोटे नवाब खड़े हो गए और बरमूडा पहने होने की वजह से उसका उभार दिखने लगा था।
एक दो बार भाभी की नजर भी उस पर पड़ गई। फ़िर भाभी ने कहा- अब चाहो तो तुम सो जाओ !
मैंने कहा- नहीं भाभी, कल रविवार है तो मैं थोड़ी देर टीवी देखूँगा। फ़िर सो जाऊँगा। आप सो जाओ।
भाभी बेडरूम में सोने चली गई और मैंने टीवी चला लिया। आधे घंटे के बाद जब मैंने देखा कि भाभी गहरी नींद में सो रही हैं मैंने ब्लू फिल्म की डीवीडी प्लयेर में डालकर चालू कर दी। उसमें अच्छा दृश्य चल रहा था और मैं भी अपना लण्ड निकाल कर हिला रहा था।
अचानक मुझे कुछ हलचल महसूस हुई तो मैंने पीछे मुड़कर देखा कि भाभी खड़ी हैं और वो भी ब्लू फिल्म देख रही हैं।
तो मैं डर गया और टीवी बन्द कर दिया और भाभी के सामने गर्दन झुकाए खड़ा हो गया।
भाभी ने पूछा- वैभव, यह क्या देख रहे थे?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं भाभी, मेरे एक दोस्त ने एक पिक्चर की डीवीडी मुझे दी थी, मुझे नहीं मालूम था कि इसमें यह सब है।
इस पर भाभी सिर्फ मुस्कुराई और कहा- झूठ मत बोलो वैभव ! जब मैं तुम्हारे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी देखा था तुम्हारे बरमूडा का तम्बू हो गया है।
और फ़िर पूछा- यह सब सिर्फ देखते ही हो या कुछ किया भी है?
तो मैंने झूठ ही कहा- नहीं भाभी, मैंने कभी ऐसा नहीं किया।
असल में मैं तो कई बार चोद चुका था।
भाभी ने कहा- चलो मेरे साथ मेरे कमरे में ! मैं तुझे आज सब सिखाती हूँ।
फ़िर क्या था ! मुझे तो इसी का इंतजार था ! मेरी तमन्ना आज पूरी होने वाली थी। मैं भाभी के पीछे उनके बेडरूम में चला गया।
जैसे ही भाभी बेड पर लेटी, मैं उन पर चढ़ गया और उनके होंटों को चूसना चालू कर दिया।
भाभी की सांसें तेज़ हो रही थी और मैं एक हाथ से उनके चूचों को मसल रहा था। उन्होंने तो ब्रा भी नहीं पहनी थी।
भाभी ने कहा- वैभव, मेरे संतरों की जरा तेल से मालिश कर दो !
तो मैंने ड्रेससिंग टेबल से तेल की शीशी ली और उनके बड़े बड़े दो संतरे गाऊन से आज़ाद कर दिए।
क्या क़यामत के गोरे और बड़े थे उनके चूचे ! और चुचूक तो एकदम गुलाबी और मोटे हो गए थे।
मैंने थोड़ा तेल उन पर डाला और जोर जोर से मसलने लगा। भाभी भी अब गर्म हो गई थी और मेरे लण्ड को अपने हाथ से सहला रही थी।
फ़िर भाभी ने कहा- चूस लो मेरे इन आमों को !
और मैं भी एक बच्चे की तरह उनके चुचूक चूसने लगा। मैं एक हाथ से उनका दूसरा चुचूक निचोड़ रहा था और दूसरे हाथ से उनकी पैंटी मैंने उतार दी और उनकी चूत में ऊँगली करने लगा।
अब भाभी आह्ह्हह्हाह्ह आह्ह्हा ओहोहोह स्स्सस जैसे जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा होकर उनसे लिपट गया। वो मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर जोर जोर से हिलाने लगी।
फ़िर मैं भाभी पर उल्टा चढ़ गया और हम 69 की अवस्था में आ गए, मैं भाभी की चूत चाटने लगा तो भाभी की सिसकारियाँ और बढ़ गई, भाभी चिल्लाने लगी- और जोर से चाटो वैभव ! आह्हह्हाह्ह आह्ह्हा ओहोहोहोह स्सस बहुत मजा आ रहा है वैभव ! मेरे राजा और जोर से चूसो मेरी चूत को।
फ़िर भाभी मेरे लण्ड को जीभ से चाटने लगी और फ़िर लोलीपोप की तरह उसे चूसने और अन्दर-बाहर करने लगी। मैं तो मानो तब स्वर्ग में था।
मैं भी जोश में आ गया था और उनकी चूत को जोर जोर से चूसने लगा था, बीच बीच में उनके दाने को भी काट रहा था। अब भाभी से रहा नहीं जा रहा था और वो जोर जोर से अपने चूतड़ हिला रही थी और बोल रही थी- कम ऑन वैभव, फक मी ! ओ या …ओ य़ा….ओ यहा…..ओह होहोह स्सस्सस्सस ! कम ओन वैभव ! और जोर से चाटो इसे ! आःह्हा ऊऊह्ह्हू स्सस्स
और मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी।
तब मैंने कहा- ओ ओ ओ भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ।
तो भाभी बोली- मैं भी झड़ने वाली हूँ !
और हम दोनों एक दूसरे के मुँह में झड़ गए। भाभी ने मेरा सारा माल निगल लिया और मैं भी भाभी का सारा रस चाट गया।
थोड़ी देर हम ऐसे ही एक दूसरे पर लेटे रहे। दस मिनट बाद भाभी फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं भाभी के चूचे सहलाने लगा।
हम फ़िर से गर्म हो गए, मेरा लण्ड तन कर आठ इंच का हो गया।
भाभी ने कहा- वैभव, अब रहा नहीं जा रहा ! जल्दी से मेरी चूत में अपना लण्ड डालो।
मैंने अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर रख दिया और एक जोर का झटका मारा तो लंड तीन इंच तक ही अंदर गया था कि भाभी जोर से चिल्लाई- हाय मार डाला मुझे ! वैभव, अपना लण्ड बाहर निकालो ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी।
तो मैं भी डर गया, अपना लौड़ा बाहर निकल लिया और भाभी से कहा- तुम क्या पहली बार चुदवा रही हो जो तुम्हें दर्द हो रहा है?
भाभी बोली- अरे नहीं, मैं तो मेरे पति से चुदवाती हूँ पर उनका इतना बड़ा और मोटा नहीं है।
फ़िर मैंने थोड़ा सा नारीयल तेल उसकी चूत में डाल दिया और ऊँगली से अन्दर लगा दिया और थोड़ा अपने लण्ड पर भी मल लिया।
उसकी टांगों को अच्छी तरह फैला कर अपना लण्ड उसकी चूत पर रख दिया और एक जोर का झटका लगाया तो मेरा लंड चार इंच तक अन्दर घुस गया और भाभी जोर जोर से चिल्लाने लगी- ओ नो वैभव ! बाहर निकालो ! जल्दी ! मुझे दर्द हो रहा है।
थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे। जब पाँच मिनट बाद उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने और एक झटका लगाया तो मेरा पूरा का पूरा लंड अन्दर चला गया। भाभी के चिल्लाने से पहले ही मैंने उसके होंटों पर अपने होंट रख दिये।
जब धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ तो उसे भी मजा आने लगा और वो अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी, मैंने भी धक्के लगाना चालू कर दिए।
अब उसे भी मजा आने लगा था तो मैंने अपने गति बढ़ा दी। फ़िर से भाभी आहें भरने लगी और सिसकारियाँ तेज़ होने लगी, वो बोल रही थी- ओ वैभव ! कम ओन…फक मी बास्टर्ड…ऊऊह्ह्ह्ह…. आआअ……ह्ह्ह…. अहहहः ….. स्स्स्स्स् ……मादरचोद…चोद दे मुझे !
और गालियाँ सुनते ही मैं पूरे जोश में आ गया और जोर जोर से चोदने लगा। अब मैं भी चालू हो गया, मैं बोला- ले मेरी रण्डी… ले मेरा लवड़ा खा जा… ले और जोर से ले… ले तेरे माँ की चूत…
और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, पूरे कमरे में सिर्फ गालियों की और फक फक फक और फच फच की आवाजें आ रही थी।
भाभी ने अपने दोनों टांगों से मुझे कस कर पकड़ रखा था और भाभी पूरे जोश में थी, बोल रही थी- भेनचोद और जोर से चोद मुझे… फाड़ दे मेरी चूत को… आआअ….. स्स्सस अहहः……अहहहः …..ओहोहोह….. ले… ले माँ के लवडे… भोसड़ा बना दे मेरी चूत को… आज से गीता तुम्हारी है… जब चाहे इसे चोदना तू।
अब भाभी चरमसीमा पर थी, वो अपने चूतड़ जोर जोर से हिला रही थी, अब भाभी बोली- वैभव, पूरी ताकत से चोद मुझे ! मैं आने वाली हूँ !
मैं भी पूरी तेजी से उसे चोदे जा रहा था। भाभी का शरीर अब अकड़ने लगा था, उसने मुझे कस कर पकड़ा और ह्ह्ह्हह…. अह्हहहः …….ह्ह्ह…. अह्हहः ……स्सस्सस करते हुवे वो झड़ गई।
पर मैं अब तक नहीं झड़ा था, अब मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं शॉट पे शॉट मारता गया और लगभग दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो भाभी से कहा- मैं आ रहा हूँ, मैं अपना लवड़ा बाहर निकाल लूँ?
तो भाभी बोली- नहीं पूरा माल अंदर ही डाल दे ! मैंने गोली ले ली है !
फ़िर क्या था, मैंने ऐसे जोर के धक्के लगाये कि भाभी भी चरमरा उठी और उसकी चूत मैंने अपने वीर्य से भर दी। फ़िर थोड़ी देर तक मैं उस पर ही लेटा रहा।
बाद में हमने बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ किया और फिर से बिस्तर पर आ गए।
उस रात मैंने भाभी को दो बार और चोदा, एक बार घोड़ी बना कर और एक बार उनकी गाण्ड भी मारी।
यह कहानी मैं बाद में बताऊँगा। फ़िर दो सालों तक मैं भाभी को इसी तरह चोदता रहा, उसके बाद भाभी का परीवार यहाँ से गुजरात में शिफ्ट हो गया।
अब हम एक दूसरे को नहीं मिल पाते पर आज भी भाभी की बहुत याद आती है।

क्या लण्ड में इतना दम है कि सारा दिन मुझे चोद सके?


कोमल की कोमल चूत की तरफ से आपको नमस्ते। मैं आपको बता दूँ कि मैंने शादी के बाद अपने पति के अलावा पहली बार अपने एन आर आई बुढे आशिक से अपनी चूत चुदवाई थी। मेरी फिगर के बारे में भी आपको पता है कि मेरा गोरा बदन, पतली कमर, लम्बे रेशमी बाल, कसे हुए चूतड़ और मोटे चूचों को देख देख लड़के तो क्या बूढ़े भी मुठ मारने के लिए मजबूर हो जाते है। मैं शादीशुदा हूँ और मेरे पति आर्मी में हैं।
मेरा एन आर आई बुड्ढा आशिक थोड़े दिनों में ही वापिस अमेरिका जाने वाला था इसलिए उसने मुझे फिर आखरी बार मिलने के लिए कहा। अब तक मुझे भी उसके लौड़े की जरूरत महसूस हो रही थी इसलिए मैं अपने ससुराल में मायके जाने का बहाना बना कर जालन्धर अपने आशिक के पास चली गई। उसके बाद मुझे अपने मायके भी जाना था जो जालन्धर के पास ही था तो वहाँ से मुझे कोई परेशानी भी नहीं थी जाने की।
मैंने उस दिन उसी की दी हुई साड़ी पहनी थी और खूब सैक्सी लग रही थी। वो बस स्टैंड पर गाड़ी लेकर आया और घर जाते समय गाड़ी में ही मेरी जांघ पर हाथ घुमाने लगा। मैं भी मौका देख कर पैन्ट के ऊपर से ही उसके लण्ड को सहलाने लगी। बंगले में पहुँचते ही उसने मुझे गोद में उठा लिया और अन्दर ले गया।
उसने मुझे कोल्ड ड्रिंक दिया और खुद बीयर पीने लगा।
फिर उसने मुझे कहा- कोमल, तुम भी बीयर का स्वाद लेकर देखो, इसमें कोई नशा नहीं है।
पहले तो मैंने मना कर दिया मगर उसके ज्यादा जोर डालने पर मैंने थोड़ी सी बीयर ले ली।
हम दोनों सोफे पर बैठे थे और उसने वहीं पर मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया। मैं भी उसका साथ देने लगी। उसने फिर एक जाम बनाया और उसमें थोड़ी सी शराब भी मिला दी। मैंने भी सोचा कि थोड़ी सी है, इससे क्या होगा, और मैंने पूरा जाम ख़त्म कर दिया।
हम दोनों आपस में लिपटे हुए थे। वो कभी मेरी चूचियों को मसल रहा था और कभी मेरी गाण्ड पर हाथ फेर रहा था। मेरी साड़ी का पल्लू भी नीचे गिर गया था और मेरे ब्लाउज में से दिख रहे गोल गोल उभारों पर अपनी जीभ रगड़ रगड़ कर चाट रहा था। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। उसका लण्ड एकदम सख्त हो चुका था। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन गई और उसके लण्ड की तरफ अपना मुँह करके उसकी पैन्ट खोल दी। उसने भी अपने चूतड़ उठा कर अपनी पैन्ट उतार दी। उसके कच्छे में उसका लण्ड पूरा तना हुआ था। मैंने उसका लण्ड बाहर निकाला और अपने हाथों में ले लिया।
वो भी मेरे लम्बे बालों में हाथ घुमाने लगा। मैंने उसके लण्ड को चूमा और फिर अपने नर्म-नर्म होंठ उस पर रख दिए। मानो जैसे मैंने किसी गरम लोहे के लठ्ठ को मुँह में ले लिया हो। मैं उसका लण्ड पूरा मुँह में ले रही थी। लप-लप की आवाजें मेरे मुँह से निकल कर से कमरे में गूंज रहीं थी।
वो भी मेरे सर को ऊपर से दबा दबा कर और अपनी गाण्ड उठा उठा कर अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूँस रहा था। उसके मुँह से भी आह आह की आवाजें निकल रही थी।
वो बोला- चूस ले रानी ! और चूस ! बहुत मज़ा आ रहा है।
मैंने कहा- क्यों नहीं राजा ! आज मैं रस पीने और पिलाने ही तो आई हूँ।
फिर उसने मेरे बालों को मेरे चेहरे पर बिखेर दिया और मुझे बाहर कुछ भी नहीं दिख रहा था। सिर्फ मेरे सामने उसका लण्ड था। एक तरफ उसका पेट और दूसरी तरफ मेरे काले घने बाल थे। मैं उसका लण्ड लगातार चूसे जा रही थी। फिर उसने मेरी पीठ पर से मेरा ब्लाउज खोल दिया और दूर फेंक दिया। फिर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया, जिसके खुलते ही मेरे दो बड़े बड़े कबूतर उसकी टांग पर जा गिरे और उसने भी अपना हाथ मेरे दोनों कबूतरों पर रख दिए। वो मेरी और सीधा हो कर बैठ गया और मेरे चूचों को जोर जोर से मसलना चालू कर दिया।
उसका हाथ कभी मेरे स्तनों पर, कभी मेरी पीठ पर और कभी मेरी गाण्ड पर चल रहा था। फिर उसने मेरी साड़ी उतार कर मेरा पेटीकोट खोल दिया। मैंने भी एक हाथ से उसको निकाल दिया और एक तरफ फ़ेंक दिया। अब मेरे बदन पर एक पेंटी ही बची थी उसने उसको भी उतार दिया। मगर मेरी पेंटी उतारते समय वो जरा सा भी आगे नहीं हुआ। मैं हैरान थी कि उसने मेरी पेंटी मेरी गाण्ड से बिना हिले कैसे नीचे कर दी।
अभी मैं सोच ही रही थी की मेरी पेंटी जो अभी जांघों पर थी, में दो उंगलियाँ घुसी और मेरी पेंटी और नीचे जाने लगी और मेरे घुटनों पर आकर रुक गई। मुझे लगा कि जैसे किसी और ने मेरी पेंटी उतारी हो।
मैंने झटके से सर को उठाया और पीछे मूड़ कर देखा तो मैं हैरान रह गई। वहाँ पर एक और बुड्ढा कच्छे और बनियान में खड़ा था।
मैंने फिर अपने आशिक की तरफ देखा तो वो बोला- जाने मन… सॉरी, मैंने तुम्हें अपने इस दोस्त के बारे में बताया नहीं। दरअसल यह कल से मेरे घर में है और आज जब सुबह तूने मुझे बताया कि तुम मुझसे मिलने आ रही हो तो मैंने इसे भेजने की कोशिश की मगर शायद इसने हमारी बातें सुन ली थी इसलिए यह मुझसे बोला कि एक बार इसे भी चूत दिला दूँ, काफी अरसे से चूत नहीं मारी। मुझे इस पर तरस आ गया।
उसने कहा- जान, मैं तुम्हें रास्ते में ही इसके बारे में बताने वाला था मगर डर गया कि कहीं तुम रूठ कर वापिस न चली जाओ, इसलिए घर आकर सोचा कि पहले मैं तुमसे मज़े कर लूँ फिर इसके बारे में बताऊँगा, मगर यह साला अभी आ गया।
मैं अभी कुछ बोली नहीं थी कि वो दूसरा बुड्ढा बोल पड़ा- यार क्या करता? इसकी मस्त गाण्ड देख कर मुझसे रहा नहीं गया।
वो दोनों अब मेरे मुँह की तरफ देख रहे थे कि मैं क्या जवाब देती हूँ। मगर मैंने जो शराब पी थी उसका नशा मुझ पर चढ़ने लगा था और फिर अगर मैं उस वक्त मना भी करती तो फिर भी वो दोनों मुझे नहीं छोड़ते और मुझे जबरदस्ती ही चोद लेते। मैंने उस दूसरे बूढ़े की ओर देखा। उसकी सेहत भी कोई खास नहीं लग रही थी। मैंने सोचा कि इसका लण्ड या तो खड़ा ही नहीं होगा या फिर दो मिनट से ज्यादा नहीं टिकेगा।
इसलिए मैंने कहा- कोई बात नहीं, मुझे तुम दोनों इक्कठे ही मजा दो। मैं तुम दोनों को आज खुश कर दूंगी।
वैसे भी अगर मैं उनकी बात नहीं मानती तो मेरी चूत भी प्यासी रह जाती जो मुझे कभी गंवारा नहीं था।
मेरी बात सुनते ही वो दोनों फिर से मुझ पर टूट पड़े। एक ने मेरे वक्ष को और दूसरा मेरी पेंटी उतार कर (जो अभी तक घुटनों पर ही थी) मेरी गाण्ड को सहलाने लगा। मैं भी अपना काम चालू रखते हुए फिर से लण्ड को सहलाने लगी। हमारी बातचीत में लण्ड थोड़ा ढीला हो गया था जो फिर से जोश में आ रहा था।
थोड़ी ही देर में मुझे दोनों लण्ड पूरे तने हुए महसूस होने लगे। एक मेरी जांघों पर और दूसरा मेरे मुँह में था। अब मुझे दूसरे बूढ़े का लण्ड देखने की इच्छा होने लगी। जिसे मैंने सोचा था कि खड़ा ही नहीं होगा। तभी पहले वाले लण्ड में हलचल होने लगी और वो बुड्ढा जल्दी जल्दी मेरे मुँह को चोदने लगा। मैं भी जोर जोर से उसके लण्ड को अपने हाथों और मुँह में लेने लगी। फिर उसका भरपूर माल मेरे मुँह में था। मैं उसको चाट गई।
उधर दूसरा बुड्ढा जो मेरी चूत और गाण्ड को चाट रहा था, ने भी अपनी जुबान का कमाल दिखाया और मेरी चूत में से पानी निकल गया। मेरी चूत में से निकल रहे पानी को वो चाट रहा था। इससे मुझे कुछ थकावट महसूस हुई और मैं सोफे पर ठीक से बैठ गई। एक लण्ड तो ढीला हो गया था मगर दूसरे में अभी दम था। वो बुड्ढा अपना नंगा लण्ड मेरे मुँह के सामने ले कर खड़ा हो गया। उसका लण्ड मैं सोच रही थी कि ज्यादा बड़ा नहीं होगा मगर सात इन्च का लण्ड देख कर मैं हैरान रह गई। बूढ़े की सेहत कमजोर थी मगर उसके लण्ड की नहीं।
मैंने अभी उसका लण्ड हाथ में पकड़ा ही था कि मेरे सामने एक और जाम लेकर वो पहले वाला बुड्ढा खड़ा था। मैंने भी बिना सोचे समझे जाम हाथ में ले लिया। मैं जानती थी कि इसमें भी शराब है। मगर पता नहीं मुझे नशा हो रहा था। मैंने उस बूढ़े का लण्ड जाम में डुबो दिया और फिर बाहर निकाल कर उसे चाटने लगी। मैं बार बार ऐसे कर रही थी और बूढ़े का लण्ड और भी बड़ा होता लग रहा था। फिर मैंने एक ही घूंट में पूरा जाम ख़त्म कर दिया।
बूढ़े ने मुझे अपनी गोद में उठाना चाहा, वो शायद मुझे बेडरूम में उठा कर ले जाना चाहता था। उसने मुझे अपनी बाँहों में उठा तो लिया मगर उसे चलने में परेशानी हो रही थी। तभी पहले वाला बुड्ढा भी आ गया और बोला- यार, संभल के ! बहुत कोमल माल है, कहीं गिर ना जाए।
फिर उन दोनों ने मिलकर मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया, बेडरूम में ले गये और मुझे बैड पर लिटा दिया।
मैंने दोनों लण्डों की तरफ देखा। एक लण्ड अभी भी ढीला था और दूसरा अभी पूरा कड़क। दूसरे बूढ़े ने मेरा सर पकड़ा और अपनी तरफ कर लिया। मेरा पूरा बदन बेड पर था मगर मेरा सर बैड से नीचे गिर रहा था मगर मेरा मुँह ऊपर की तरफ था। मेरे मुँह के ऊपर बूढ़े का लण्ड तना हुआ था। मुझे पता था कि अब क्या करना है। बूढ़े ने अपना लण्ड मेरे चेहरे पर घुमाते हुए मेरे होंठों पर रख दिया। मैं भी अपने होंठों से उसको चूमने लगी और अपने होंठ खोल दिया। बुड्ढा भी समझदार था। उसने एक हाथ से मेरे सर को सहारा दिया और अपना लण्ड मेरे होंठों में ऐसे घुसा दिया और फिर अन्दर-बाहर करने लगा जैसे किसी गोल खुली हुई चूत में लण्ड घुसाते हैं। फिर उसने मेरे सर को छोड़ कर मेरे दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर लिया। मेरा सर लटक रहा था और उस पर बूढ़े के लण्ड के धक्के, उसके दोनों हाथ मेरे उरोजों को मसल रहे थे।
अब दूसरा बुड्ढा भी बैड पर आ गया और मेरी टाँगे खोल कर मेरी चूत पर अपना मुँह रख दिया। वो मेरी चूत के ऊपर बीयर डाल रहा था और फिर उसे चाट रहा था। कभी कभी वो मेरे पेट पर मेरी नाभि में भी बीयर डाल कर उसे चाटता। उसकी जुबान जब मेरी चूत के अन्दर जाती तो मचल कर मैं अपनी गाण्ड ऊपर को उठाती मगर ऐसा करने से मेरे मुँह में घुस रहा लण्ड और आगे मेरे गले तक उतर जाता।
फिर उन दोनों ने मुझे पकड़ कर बैड पर ठीक तरह से लिटा दिया। अब दूसरा लण्ड भी कड़क हो चुका था और पहले वाला तो पहले से ही कड़क था।
अब मेरी चूत की बारी थी चुदने की। मैं बैड पर अभी ठीक से बैठ ही रही थी कि वो सेहत से कमजोर बुड्ढा मुझ पर टूट पड़ा और मुझे नीचे लिटा कर खुद मेरे ऊपर आ गया। मेरी चूत तो पहले से लण्ड के लिए बेकरार हो रही थी। इस लिए मैंने भी अपनी टाँगें ऊपर उठाई और उसने अपना लण्ड मेरी चूत के मुँह पर रख कर धक्का मारा। उसका लण्ड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ आधा घुस गया। मैं इस धक्के से थोड़ी घबरा गई और अपने आप को सँभालने लगी। मगर फिर दूसरा धक्का में पूरा लण्ड मेरी चूत के बीचोंबीच सुरंग बनाता हुआ अन्दर तक घुस गया।
मुझे लगा जैसे मेरी चूत फट जायेगी।
मेरे मुँह से निकला- अबे साले, मेरी फाड़ डालेगा क्या… आराम से डाल ! मैं कहीं भाग तो नहीं रही !
वो बोला- अरे रानी… तेरी जैसी मस्त भोसड़ी देख कर सब्र नहीं होता… दिल करता है कि सारा दिन तुझे चोदता रहूँ।
मैं बोली- क्या लण्ड में इतना दम है कि सारा दिन मुझे चोद सके?
इस बात से वो गुस्से में बोला- वो तो साली अभी पता चल जाएगा तुझे…
और मुझे और जोर से चोदने लगा।
मुझमें भी आग थी। मैं भी उसका साथ कमर हिला-हिला कर दे रही थी। आखिर मेरा माल छुटने लगा और मैं उसके सामने निढाल हो कर पड़ गई मगर वो अभी भी मुझे रोंदे जा रहा था, मेरी चूत से फच-फच की आवाजें तेज हो गई थी। मैं उसके नीचे मरे जा रही थी।
तभी दूसरा बुड्ढा आया और उसको बोला- चल, अब मुझे भी कुछ करने दे।
मैं भी बोली- अरे अब बस कर ! तू तो सच में मुझे मार डालेगा… पता नहीं तेरा लण्ड है या डंडा?
वो बोला- साली, अभी तो तुझे मैं और चोदूँगा… तुझे बताऊँगा कि मुझमें कितना दम है।
फिर दूसरा बुड्ढा बिस्तर पर लेट गया और बोला-चल, मेरे लण्ड पर बैठ जा !
मैंने वैसे ही किया। उसका लण्ड पूरा डंडे जैसा खड़ा था। मैं उस पर बैठ गई और उसका लण्ड मेरी गीली चूत में आराम से घुस गया। मैं उसका लण्ड मजे से ऊपर नीचे होकर अन्दर बाहर कर रही थी।
वो मेरे नीचे बोला- आह… आह रानी… बहुत मजा आ रहा है… प्यार से मुझसे चुदती जा…. मैं भी तुझे प्यार से चोदूँगा।
वो मेरी छाती पर हाथ घुमाता हुआ बोला- ये अपने मम्मे मेरे मुँह में डाल दे रानी।
मैंने भी अपनी एक चूची उसके मुँह पर रख दी जिससे मेरी गाण्ड पीछे खड़े बूढ़े के सामने आ गई और वो मेरी गाण्ड में उंगली घुसाने लगा।
उसकी इस हरकत से मुझे भी मजा आया मगर मैंने यूँ ही उसको कहा- बूढ़े… अब भी पंगे लिए जा रहा है… तूने पहले अपने दिल की कर तो ली है मेरे साथ।
तो वो बोला- अभी कहाँ की है… अभी तो मेरा माल भी नहीं निकला है !
और वो मेरी गाण्ड में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।
मैं सिसक-सिसक कर दोनों छेदों की चुदाई का मजा ले रही थी। मगर अब जो होने वाला था वो मेरे लिए सहन करना नामुमकिन था।
पीछे वाले बूढ़े ने मेरी गाण्ड पर कोई क्रीम लगाई और अपने लण्ड का सुपारा मेरी गाण्ड में घुसेड़ दिया। मेरी जैसे गाण्ड ही फट गई हो। एक लण्ड मेरी चूत में था और दूसरा मेरी गाण्ड में जाने वाला था।
मैं दोनों बुड्डों के बीच में फंसी हुई चिल्ला रही थी- अरे मादरचोद छोड़ दे मुझे… तुम दोनों मुझे मार डालोगे।
मगर उन पर जैसे मेरी बातों का कोई असर नहीं हो रहा था। दोनों ही अपना अपना लण्ड अन्दर घुसेड़ रहे थे।
पीछे वाला बुड्ढा तो मुझे गाली दे दे कर चोद रहा था और नीचे वाला भी मुझे बोल रहा था- बस रानी, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा।
और वैसे ही हुआ, थोड़ी देर में मैं दोनों छेदों से मजे लेने लगी। मैं अपनी गाण्ड और चूत धक्के मार-मार कर चुदवा रही थी।
फिर ऊपर वाले बूढ़े ने मेरी गाण्ड में अपना माल निकल दिया। गाण्ड में गर्म-गर्म माल जाते ही मुझे और सुख मिलने लगा। अब मैं भी फिर से छुटने वाली थी। मैं जोर जोर से धक्के मारने लगी और मेरा पानी नीचे वाले बूढ़े के लण्ड पर बहने लगा। उसने मेरी चूत में से लण्ड निकाला और मुझे घोड़ी बना लिया और फिर उसने मेरी गाण्ड में लण्ड पेल दिया।
मैं भी घोड़ी बन कर अपनी गाण्ड के चुदने का मजा ले रही थी। वो मुझे जोर जोर से धक्के मार रहा था। पर अब मेरी गाण्ड का मुँह खुल चुका था और मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही थी। फिर जब उसका भी छूटने लगा तो उसने अपना लण्ड बाहर निकाल कर मेरे वक्ष पर वीर्य की बौछार कर दी। मैं भी उसका लण्ड जीभ से चाटने लगी।
शाम तक मैं वहाँ पर चुदती रही और फिर वो दोनों मुझे गाड़ी में बिठा कर मेरे मायके गाँव छोड़ने आये। उन्होंने मुझे गाँव से पीछे ही उतार दिया और वहाँ से मैं पैदल अपने घर चली गई। मगर मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था।
मेरी गाण्ड और चूत का बुरा हाल हो रहा था, मेरी बिगड़ी हुई चाल देख कर मुझे मेरी भाभी ने पूछा भी था- क्या बात है…?
तो मैंने कहा- बस से उतरते समय पैर में मोच आ गई थी।
फिर मैं चुपचाप बिस्तर पर लेट गई। तब जाकर कहीं मेरी चूत और गाण्ड को कुछ राहत मिलने लगी।
दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी जरूर पसंद आई होगी…
 
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